
करीब 50 गांवों के लिए एकमात्र राजपुर जिगिनिहा का घोंघी
नदी घाट जन प्रतिनिधियों के उपेक्षा का शिकार
क्षेत्र में शवदाह गृह की सुविधा नहीं होने से ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बारिश के मौसम में स्थिति और भी विकट हो जाती है। करीब 50 गांवों के लोगों के लिए राजपुर-जिगिनिहा स्थित घोंघी नदी घाट अंतिम संस्कार का प्रमुख और लगभग एकमात्र सहारा बना हुआ है। लेकिन यहां आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का अभाव होने के कारण लोगों को मौसम की मार झेलते हुए अंतिम संस्कार करना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान घाट पर शव के अंतिम संस्कार के लिए सबसे बड़ी समस्या चिता को बारिश से बचाने की होती है। तेज बारिश होने पर लकड़ियां गीली हो जाती हैं और अंतिम संस्कार में काफी दिक्कत आती है। कई बार परिजनों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। खुले स्थान पर अंतिम संस्कार होने के कारण मृतक के परिजनों और साथ आए लोगों को भी बारिश में परेशान होना पड़ता है।
घोंघी नदी घाट पर न तो व्यवस्थित शवदाह गृह है और न ही बारिश व धूप से बचाव के लिए पर्याप्त शेड की व्यवस्था इसके अलावा घाट पर साफ-सफाई बैठने प्रकाश और अन्य जरूरी सुविधाओं की भी कमी है। ऐसे में किसी परिवार में मौत होने पर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र की बड़ी आबादी इस घाट पर निर्भर है। करीब 50 गांवों के लोग यहां अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं। इसके बावजूद लंबे समय से शवदाह गृह जैसी बुनियादी सुविधाऐं उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है। ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग से घोंघी नदी घाट पर जल्द से जल्द पक्का शवदाह गृह, टीनशेड, पेयजल, प्रकाश और साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है।
बरसात के दिनों में अंतिम संस्कार के दौरान समस्या कई गुना बढ़ जाती है। खुले आसमान के नीचे चिता सजाने से लेकर अंतिम संस्कार पूरा करने तक बारिश बाधा बनी रहती है। लोगों का कहना है कि मृत्यु के दु:ख की घड़ी में परिवार पहले ही मानसिक रूप से परेशान होता है। ऐसे में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में होने वाली परेशानी उनकी मुश्किलें और बढ़ा देती है।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घोंघी नदी घाट की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराकर वहां स्थायी शवदाह गृह का निर्माण कराया जाए ताकि बारिश और अन्य मौसम में लोगों को अंतिम संस्कार के दौरान परेशानियों का सामना न करना पड़े।

